रिकॉर्ड रुम आग के हवाले, लगी या लगाई?

उज्जैन । उज्जैन कोठी पैलेस पर कलेक्टर कार्यालय के ऊपर बने रिकॉर्ड रूम को आखिर आग कैसे लगी या लगाई गई। यह पहलू को सुलझाने में आग की कई जांच एजेंसियां अपने अपने स्तर पर लगी हुई है। उज्जैन में कमिश्नरी की स्थापना 1 जनवरी 1977 को हुई थी। उसके पहले इंदौर में कमिश्नरी प्रथा लागू थी। उज्जैन की कमिश्नरी की अपीलो की सुनवाई इंदौर में की जाती रही है। वहां पर सन् 1947 से लेकर 1977 तक की कमिश्नरी में सुनवाई 30 वर्ष तक की गई इंदौर में उज्जैन कमिश्नरी की सुनवाई 30 वर्षों तक की गई थी। वही सुनवाई का पूरा रिकॉर्ड उज्जैन में कमिश्नरी की स्थापना होने के बाद पूरा रिकार्ड उज्जैन में शिफ्ट कर दिया गया था। इस पूरे मामले में जो रिकॉर्ड इंदौर से उज्जैन स्थानांतरण किया गया था। उक्त रिकार्ड की पंजी का उल्लेख तो रेकार्ड विभाग में उपलब्ध नहीं हैं। नही कलेक्टर कार्यालय एवं नहीं संभागायुक्त कार्यालय में है। ऐसे में उक्त रिकार्ड को इंदौर से उज्जैन में स्थानांतरण किया गया आखिर में यह कीन  शासकीय एवं नीजि भूमियों का रिकॉर्ड था आखिर में इसका सत्यापन कौन करेगा उज्जैन में कमिश्नरी स्थापना वर्ष 1 जनवरी 1970 से आज तक कौन-कौन अपर आयुक्त बाबू पदस्थ रहे हैं। उनके बारे में जांच एजेंसियों को पूछताछ की जाना चाहिए जिससे पूरी सच्चाई सामने आ सके इन्दौर कमिश्नरी कार्यालय द्वारा इंदौर से उज्जैन स्थानांतरण रिकॉर्ड करना अति आवश्यक होता है पर बीना पंजी के इंदौर से उज्जैन आया रिकॉर्ड  रर्दी के समान माना जा सकता है। क्योंकि वक्त रिकॉर्ड बिना पंजी के बस्ते में से कैसे देखा जाएगा इससे साफ जाहिर होता है कि जो रिकॉर्ड इंदौर से उज्जैन कार्यालय में स्थानांतरण किया गया है उसका रिकॉर्ड पंजी न तो इंदौर कार्यालय में न ही उज्जैन मे हैं। जब  उज्जैन जिले से उज्जैन संभाग बनाए जाने के बाद इंदौर कमिश्नरी की सुनवाई उज्जैन में ही होने के कारण पूरा रिकॉर्ड स्थानांतरण कर उज्जैन तो भेजा गया पर उक्त रिकार्ड के साथ में रिकॉर्ड पंजी नहीं भेजी गई। उक्त रिकार्ड के बारे में कलेक्टर कार्यालय एवं संभाग आयुक्त कार्यालय के कई वरिष्ठ अधिकारियों कर्मचारियों को उक्त रिकार्ड की जानकारी नहीं है । अगर उक्त रिकार्ड रूम में ताला लगा होने की जानकारी है तो इस रिकॉर्ड रूम की किस कर्मचारी के पास रिकॉर्ड रूम की चाबी है। उसी बाबू के पास उक्त रिकॉर्ड का पंजी रजिस्टर भी होना चाहिए। जिसकी जांच की जाना अति आवश्यक है। पूरा रेकॉर्ड रुम आग के हवाले होने के बाद लगभग 2 हफ्ते बाद संबंधित थाना क्षेत्र माधव नगर में पुलिस कार्रवाई की गई जिसमें विभिन्न धाराओं में प्रकरण दर्ज कर 457, 436, भादवी 3/4 लोकसंपत्ति सरकारी रिकॉर्ड अधिनियम 1984 के तहत प्रकरण दर्ज कर जांच की जा रही है। इस ओर से अब कई जाकर अधिकारियों ने अपने अधीनस्थ अधिकारी कर्मचारियों के माध्यम से लिखित में आवेदन दिया गया आखिर में विलम्ब से एफ आई आर दर्ज कराने का कारण क्या होगा । क्योंकि जवाब तो अधिकारियों को ही देना पड़ेगा क्योंकि आखिर में रिकॉर्ड किन-किन शासकीय निजी संपत्तियों का था । उसका भौतिक सत्यापन कैसे होगा उज्जैन रिकॉर्ड रूम में आग के हवाले होने के बाद कमिश्नरी कार्यालय व अन्य विभागों के 2 दर्जन से अधिक अधिकारियों को जले हुए रेकॉर्ड के कुछ बच्चे अवशेषों को खंगालकर पंजी बनाने के काम में लगा रखा है।


 कलेक्टर कार्यालय के उपर रिकॉर्ड रूम में आग लगी या लगाई गई।


 उज्जैन जिला से उज्जैन संभाग की स्थापना 1977 में हुई।


1947 से 1977 तक 30 साल का रिकॉर्ड हुआ खाक।


कमिश्नरी व अन्य विभागों के दो दर्जन अधिकारियों बाबू  लगे पंजी बनाने में