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लोकायुक्त जांच 4248/2019 में फंसे 


उज्जैन नगर निगम अधिकारी खोबरागड़े 


और नागदा नपा के इंजीनियर शाहिद मिर्जा


उज्जैन । उज्जैन जिले की नागदा तहसील में महाराणा प्रताप की प्रतिमा को लेकर की गई एक शिकायत में दो ओहदेदार अफसर लोकायुक्त की जांच में फंस गए है। उज्जैन नगर निगम के अधिकारी भविष्य कुमार खोबरगढ़े तथा नागदा नपा में पदस्थ इंजीनियर शहिद मिर्जा के खिलाफ लोकायुक्त में जांच प्रकरण पंजीकृत हुआ। यह मामला तब का है जब खोबरगढ़े नगरपालिका नागदा में सी.एम.ओ थे। इस प्रकरण में बतौर तीन तत्कालीन जनप्रतिनिधि नागदा के पूर्व विधायक दिलीपसिंह शेखावत, पूर्व नपा अध्यक्ष अशोक मालवीय व पूर्व नपा लोकनिर्माण समिति के अध्यक्ष हरीश अग्रवाल के नाम भी जांच के दायरे में हैं। हालांकि, तीनों जनप्रतिनिधियों का कार्यकाल समाप्त हो चुका है।
अधिकारी खोबरगढ़े जांच प्रकरण से अनभिज्ञ हैं
इस प्रकरण के मुख्य किरदार खोबरगढ़े को माना जा रहा है। ऐसे मे द्वारा सम्पर्क करने पर उन्होंने ऐसी लोकायुक्त कार्यवाही से अनभिज्ञता जताई। हालांकि उन्होंने लोकायुक्त के विधि अधिकारी के जारी निर्देश की प्रति चाही थी, जोकि उन्हें तत्काल उपलब्ध करा दी है। बाद में उन्होंने बताया कि मेरे कार्यकाल में नोटशीट पर संभवत यह लिख दिया था कि प्रतिमा आने के बाद ही भुगतान किया जाए। प्रतिमा लगाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट के क्या दिशा- निर्देश हैं, इस बारे में उनको जानकारी नहीं है।
 जांच प्रकरण क्रमांक 4248/ 2019 की सूचना


लोकायुक्त ने यह कार्यवाही आरटीआई कार्यकर्ता अभय चौपड़ा निवासी मनोहर वाटिका नागदा की एक शिकायत पर की है। लोकायुक्त ने जांच प्रकरण क्रमांक 4248/ 2019 पर पंजीकृत किया है। लोकायुक्त विधि सलाहकार-4 मधुसुदन मिश्र ने एक लिखित निर्देश में इस प्रकरण से संबधित दस्तावेजों के सत्यापन के लिए समय निर्धारित किया है। जिसकी सूचना विधिवत शिकायतकर्ता को जारी की है। गुरुवार को अभय चौपड़ा ने इस निर्देश की प्रति  समाचार पत्र को जारी की। निर्देश की प्रति समाचार एजेंसी संवाददाता के पास सुरक्षित है । 23 मार्च तक  सत्यापन की हिदायत
लोकायुक्त विधि सलाहकार के जारी निर्देश पत्र में अभय चौपड़ा को निर्देश दिया गया है कि लोकायुक्त संगठन में 7 जनवरी 2020 को प्राप्त शिकायत के समर्थन में मूल दस्तावेज दिनांक 23 मार्च  तक प्रस्तुत करें। क्या है शिकायत शिकायतकर्ता द्वारा उपलब्ध कराई गई मूल शिकायत की प्रति के मुताबिक यह पूरा मामला नागदा शहर में महाराणा प्रताप की प्रतिमा लगाने से जुड़ा है। शिकायत में उल्लेख है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय में सार्वजनिक उपयोग के स्थानों पर प्रतिमा लगाना अनुचित माना गया है। उसके बावजूद नपा नागदा के परिषद सम्मेलन में 29 सितम्बर 2017 को प्रस्ताव पर स्वीकृति ली गई। इसी प्रकार से सडक़ विकास निगम के पत्र में महाराणा प्रताप की प्रतिमा लगाने की अनुमति नहीं दी गई। इस पत्र में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश का हवाला दिया गया कि सार्वजनिक सडक़ व चौराहे पर प्रतिमा लगाने पर प्रतिबंध है। नपा की नोटशीट पेज क्रमांक 11 से 14 तक चलाकर 31 अगस्त 2019 को प्रतिमा लगाने का निर्णय लिया गया। इसी प्रकार से कलेक्टर उज्जैन ने पत्र क्रमांक 4662 दिनांक 11 जून 2018 को सुप्रीम कोर्ट के प्रतिबंध के बावजूद नपा नागदा की निधि से प्रतिमा लगाने की अनुमति दी गई। बाद में प्रतिमा स्थापना के लिए 23 लाख 55 हजार के  एक मात्र टेंडर का न्युनतम मान कर सप्लाय आदेश भी जारी कर भुगतान भी कर दिया। मप्र भंडार क्रय अधिनियमों की शर्तों के विपरीत जाकर एग्रीमेंट के तहत प्रतिमा का अग्रिम भुगतान कर दिया गया। जबकि प्रतिमा की स्थापना नहीं हुई है। 
 तत्कालीन कलेक्टर उज्जैन ने दी अनुमति
शिकायत में यह मामला भी उठाया गया कि तत्कालीन कलेक्टर मनीषसिंह ने गैेर कानूनी रूप से वितीय अनुमति दी गई है। उन्होंने राजनैतिक प्रभाव में यह निर्णय दिया। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को अनदेखा किया। चोपड़ा ने अपनी इस बात के समर्थन में लोकायुक्त के समक्ष पूर्व में ही दस्तावेज पेश कर दिए है।